Tuesday, 9 October 2018

हिन्दी दिवस गीत-प्रेरक हिंदी कविता,Hindi Diwas song lyrics,हिंदी हिंदुस्तान की धड़कन,राष्ट्रभाषा दिवस



आ अब लौट चलें, आचार्य विद्या सागर जी का आव्हान ,मातृ भाषा से जोड़ें ,जुड़ें,जागृत करें देश को,संस्कार, संस्कृति, बचाने एकजुट हो जाऐं ।संयोजन ,स्वर,लेखन- अवशेष जैन बेंटिया ,रिकॉर्ड-सचिन उपाध्याय, विडियो-पायल स्टूडियो जबलपुर आप सुधीजनों के लिए प्रस्तुत है हिंदी दिवस पर यह हिंदी भाषा गीत,कृपया प्रचार-प्रसार में सहभागी बनें !

हिंदी हिन्दोस्तान की धड़कन इसे सम्मान दो,
मातृभाषा ,मातृभूमि का नहीं अपमान हो,
न कभी अपमान हो

संस्कृत जननी है जिसकी ,हिंदी उसका लाल है, हिंदी उसका लाल है
हिंदी की बिंदी से दमके ,भारती का भाल है,
मां भारती का भाल है
तोड़ दो अब सैंकड़ों वर्षों पुरानी बेड़ियां,
वर्षों पुरानी बेड़ियां
अब गुलामों की वो भाषा न मेरी पहचान हो,
हिंद के गौरव उठो, हिंदी को उच्च स्थान दो,
हिंदी हिन्दोस्तान की धड़कन इसे सम्मान दो.

लिपि है देवनागरी देवत्व देती दान में,
देवत्व देती दान में
आंग्ल भाषा तमस गुण प्रदान करती ज्ञान में,
प्रदान करती ज्ञान में
मां की बोली से प्रथम हमको मिली संवेदना, मां की बोली से प्रथम हमको मिली संवेदना
मां से ,माटी से कहीं ,न जानकर अंजान हों,
तन का ,मन का, और वतन का ,हिंदी से उत्थान हो, हिंदी हिन्दोस्तान की धड़कन..
मातृभाषा मातृभूमि का नहीं अपमान हो,ना कभी अपमान हो…

हृदय की हिंदी है भाषा, हिंदी है दिल का सुकून, हिंदी है दिल का सुकून
कार्य क्षमता को बढ़ाने इसमें है ज़ोशे ज़ुनून, इसमें है ज़ोशे ज़ुनून
संवाद सीधा सर्वहारा वर्ग से हमें जोड़ता,हर वर्ग से हमें जोड़ता
आबाद हर एक प्रांत की रग में लहू बन दौड़ता
हिंदी के कल्याण से ही राष्ट्र का निर्माण हो, हिंदी हिन्दोस्तान की धड़कन इसे सम्मान दो.

राष्ट्र भाषा न हो जिसकी गूंगा और बेकार है, गूंगा और बेकार है
राष्ट्र से जो प्यार न करते, उन्हें धिक्कार है, हां उन्हें धिक्कार है
एकता की जान हिंदी,शान हिंदी से हैं हम
भारतीय को भेंट में यह ईश्वरीय उपहार है, ईश्वरीय उपहार है
हिंदी के ही विकास से विकास हिन्दोस्तान का
राष्ट्र की भाषा से गौरव राष्ट्र के सम्मान का,
राष्ट्र की भाषा से गौरव राष्ट्र के सम्मान का
( परम निवेदन )
आईये संकल्प लें हम स्वदेश, संस्कार, संस्कृति और स्वाभिमान की संरक्षणी, राष्ट्र भाषा के उत्थान का, जय हिन्द,जय भारत
वंदेमातरम्

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